Zindgi Bojh Sahi

 Zindgi Bojh Sahi




कभी अकेले मे युही रोना भी पड़ता है ,
सारे दिन की झूठी हशी को रात को धोना भी तो पड़ता है ,

हम तो ये सोच कर बिताते है वक्त अपना
ज़िंदगी बोझ सही उठाना भी तो पड़ता है ||